आज के बच्चो में भारतीय संस्कारों का अभाव
यह केवल मेरे स्वयं के विचार है, साइकोलॉजी में विद्वानों ने कहा है- बालक जन्म के समय न तो सामाजिक होता है और नही असमाजिक में इस बात खुुला समर्थन करता हु।
मेने आज तक वही लिखा जो मेने या फिर अपनो से महसूस किया बालक जन्म के कुछ वर्षो तक यह नही जानता कि क्या उसका धर्म है। माता पिता कौन है,
जन्म से ही बालक का पालन पोषण उसके माता पिता द्वारा ही होता है, वह उसको बोलना पढ़ना लिखना सबसे परिचय करवाते है अर्थात बालक को प्रथमिक शिक्षा प्रदान करते है
अतः बालक की प्रथम पाठशाला उसका परिवार ही होता है।
माता पिता सम्पूर्ण जीवन मे परिश्रम करके तथा उनके द्वारा कमाए पेसो का स्वयं उपुयोग न करके स्वयं की आवश्यकता को पूरा नही करके उनको(बच्चो को ) हर सुविधा मुहैया करवाते है,
जीवनभर दुख उठाते ओर बच्चो को किसी भी चीज़ की कमी महसूस नही होने देते
बच्चे जब बडे होते है तो उन्हें बेहतर शिक्षा के लिए गांव से शहर की ओर भेजते है, जिसे बालक अच्छी मेहनत करके अच्छे अंक प्राप्त कर सके तथा नोकरी पा सके स्वयं को सक्षम बना सके।
हर बच्चे को अपने पिता से बहुत उम्मीदे होती है
ओर हर पिता को अपने बच्चो से बहुत उमीद होती है
इस प्रकार जब पिता अपने बच्चो को अच्छी जिंदगी जीने के लिए सक्षम बना देते है
तो उन माता पिता जिन्होंने सम्पूर्ण जीवन मे अच्छी सुख सुविधावों को त्यागकर बच्चो के भविष्य के लिये अपना सब कुछ दे दिया तो उन माता पिता को हर सुविधा और एक बेहतर जीवन देना उनकी संतान का पहला धर्म हो जाता है।
लेकिन आज कल धारणा ही बदल गयी -पिता के परिश्रम के पेसो ने जिस बच्चे को सक्षम बना दिया
उसके मन मे अहंकार उत्तपन्न हो जाता है
उसका माता पिता के प्रति जो दायित्व होता है,
वह उसे भूल जाता है ,
वह इस बात को भी भूल जाता है कि उसको सक्षम बनाने के लिए माता पिता ने कितने कष्ट उठाये होंगे।
ओर वह माता पिता से इस तरह बात करे कि उनका दिल दुखे उसको वाणी में अहंकार छिपा हुआ हो
श्रीमदभागवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है-
जो मेरी बात को अहंकार से सुनेगा ओर मेरे प्रति शब्दो मे अहंकार का भाव रखेगा वह नष्ट हो जाएगा
लेकिन लोगो को यह बात क्यों समझ नही आती की माता पिता की भगवान के तुल्य होते है
ओर उनकी ही बात नही सुने जिन्होंने जन्म दिया शिक्षा दी सक्षम बनाया वह सक्षम कैसे नही हो सकता
हालांकि सभी बच्चे इस तरह के नही होते
लेकिन ऐसा कहा जाता है कि- शरीर के किसी अंग के चोट लग जाने या कट जाने से पूरे शरीर मे दर्द ,शरीर की शोभा बिगड़ जाती है,
उसी प्रकार उस शरीर रूपी माता पिता को उतना ही दर्द होता है।
दुनिया का सबसे पवित्र रिश्ता प्रेम होता है।
जो सबसे पहले माता पिता और परिवार से प्राप्त होता है।
आज सयुक्त परिवार टूट रहे है और लोग इस बात को कह कर टाल देते है कि शिक्षा सयुक्त परिवारों के टूटने का कारण है में इसका पुरजोर विरोध करता हूं।
मेरा मानना है, कि सयुंक्त परिवारों का टूटने
कि वजह शिक्षा नही...................
पश्चिमी शिक्षा नही बल्कि........
भारतीय संस्कृति का लुप्त होना
संसकारो से वंचित कर देना
ओर पश्चिमी संस्कृति की ओर
जाना है
नरेश शर्मा(Naresh sanadhaya)
Writter
में यह नही कहता कि में अच्छा इन्सान हु
लेकिन में सबको अच्छा इंसान बनना चाहता हूँ।
कुछ बुराइयां सब मे होती है.........
में उन बुराइयों को खत्म करना चाहता हूँ।
मेरे द्वारा लिखी गयी हर पंक्ति के पीछे
रहस्य छिपा रहता है
मेरे से जुड़ा हुआ इंसान नकारात्मकता से
निकल कर सकारात्मकता की ओर बढ़ता है।
धन्यवाद।।
नरेश शर्मा
Comments
Post a Comment