स्वार्थी संसार के स्वार्थी लोग
स्वार्थी संसार के स्वार्थी लोग
-: लेखक :-
नरेश सनाढ़य शर्मा
जिला बूँदी राजस्थान
( 9610511411)
मुझे ये
संसार अधूरा लगता है
क्या करू, क्या न करू
सपनो का संसार सुहाना
मुझे लगता है।
दिन मे अंधेरा
रात मे रोशनी
सा लगता है,
मुझे ये संसार
अधूरा लगता है।
दिन मे सन्नाटा
छाया रहता
रात मे खिलतीं
फूलो कि कलिया
सपनो का संसार
सुहाना लगता है।
संध्या वंदन करने को
मंदिर मे जाता
तने मरते लोग मुझे
दिन मे ये क्यों आता
ईश्वर पूजा मे करता
मध्य रात्रि स्नान जो करता
नित्य कर्म अपना करता
लोग पागल आवारा कहते
सब सुन सुनकर काम
काम स्वयं का करता
मुझे ये
संसार अधूरा लगता है।
सपनो का संसार
सुहाना लगता है,
यहां झूठ को शाबासी देते
सच को झूठलाते
यह झूठा संसार
अधूरा लगता है,
मुझे प्यार भरा
सपनो का संसार
सुहाना लगता है।
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