यह केवल मेरे स्वयं के विचार है, साइकोलॉजी में विद्वानों ने कहा है- बालक जन्म के समय न तो सामाजिक होता है और नही असमाजिक में इस बात खुुला समर्थन करता हु। मेने आज तक वही लिखा जो मेने या फिर अपनो से महसूस किया बालक जन्म के कुछ वर्षो तक यह नही जानता कि क्या उसका धर्म है। माता पिता कौन है, जन्म से ही बालक का पालन पोषण उसके माता पिता द्वारा ही होता है, वह उसको बोलना पढ़ना लिखना सबसे परिचय करवाते है अर्थात बालक को प्रथमिक शिक्षा प्रदान करते है अतः बालक की प्रथम पाठशाला उसका परिवार ही होता है। माता पिता सम्पूर्ण जीवन मे परिश्रम करके तथा उनके द्वारा कमाए पेसो का स्वयं उपुयोग न करके स्वयं की आवश्यकता को पूरा नही करके उनको(बच्चो को ) हर सुविधा मुहैया करवाते है, जीवनभर दुख उठाते ओर बच्चो को किसी भी चीज़ की कमी महसूस नही होने देते बच्चे जब बडे होते है तो उन्हें बेहतर शिक्षा के लिए गांव से शहर की ओर भेजते है, जिसे बालक अच्छी मेहनत करके अच्छे अंक प्राप्त कर सके तथा नोकरी पा सके स्वयं को सक्षम बना सके। हर बच्चे को अपने पिता से बहुत उम्मीदे होती है ओर हर पि...