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स्वार्थी संसार के स्वार्थी लोग

                स्वार्थी संसार के स्वार्थी लोग                           -: लेखक :-                    नरेश सनाढ़य शर्मा                  जिला बूँदी राजस्थान                   ( 9610511411) मुझे ये संसार अधूरा लगता है क्या करू, क्या न करू सपनो का संसार सुहाना मुझे लगता है। दिन मे अंधेरा रात मे रोशनी सा लगता है, मुझे ये संसार अधूरा लगता है। दिन मे सन्नाटा छाया रहता रात मे खिलतीं फूलो कि कलिया सपनो का संसार सुहाना लगता है। संध्या वंदन करने को मंदिर मे जाता तने मरते लोग मुझे दिन मे ये क्यों आता ईश्वर पूजा मे करता मध्य रात्रि स्नान जो करता नित्य कर्म अपना करता लोग पागल आवारा कहते सब सुन सुनकर काम काम स्वयं का करता मुझे ये  संसार अधूरा लगता है। सपनो का संसार सुहाना लगता है, यहां झूठ को शाबासी देते सच को झूठलाते यह झूठा संसार अधूरा लगता है, मुझे प्...

।। जी करता है ।।

ज़ी करता है । कि मार जाऊ जी करता है  किसी मे या  कहि में खो जाऊ जिंदगी बन जाये  खोयी सी सपने बन जाये  खोये से याद जब आये उनकी मूरत  बन जाऊं न कह पाऊ  किसी से न सुन पाऊ किसी का  वो भौली सी सूरत बन जाऊं जी करता है। मर जाऊ सोचता हूँ जाने के बाद  भुला न दे वो  कुछ ऐसा कर जाऊ सिर्फ एहसास हो  जाए उनको कि  कोई देख कर जीता था उनको तो कोई देखने  के लिए रोता था  किसी कि सांसे  चलने की वजह  वह थी किसी कि सांसे  रुकने की वजह  वह थी किसी की धड़कन  वह थी तो किसी का जीवनसाथी बनने वाली वह थी जी करता है मर जाऊ जी करता है किसी मे या कहि में खो जाऊ जी करता है  उनकी सांसो में खो जाऊ उनकी यादों में खो जाऊ जी करता है देखते देखते  ख्वाबो में  उनके मर जाऊ..... नरेश शर्मा -शायर तेरी नज़रो का  बूंदी राजस्थान 9610511411

"तुम्हे पाना एक सपना"

तुम्हे पाना   एक सपना था  तुम्हे प्यार करना  एक सपना था  तुम पर सब कुछ  लुटा देना एक सपना था  मिले मगर  एक पल के लिए अपना लिया  मगर एक पल के लिए कहते है, सच्चा प्यार मिलता है। हा मिला मगर एक पल के लिए इंतज़ार किया सालो तक  इंतज़ार खत्म हुआ मगर एक पल लिए तुम्हे पाना सपना ही बना रहेगा  शायद  हमेशा के लिए  हमेशा के लिए... नरेश शर्मा -शायर तेरी नज़रो का बूंदी राजस्थान  9610511411

सयुक्त परिवार सबसे बड़ी सम्पति भी ओर ताक़त भी

एक वृक्ष अनेक शाखाऐ अनेक टहनियाँ ओर अनेक हरी पतियॉ होती है।   जो वृक्ष को सुंदर बनाती है,  वृक्ष का परिवार उसकी शाखाये टहनियाँ ओर हरी भरी पतियाँ उस पेड़ रूपी परिवार को कितना सुंदर और सुशोभित ,मनमोहक बनाती है, व्रक्ष में सबका अपना महत्व होता है, मूल पेड़ उसकी पतिया शाखा सब महत्वपूर्ण है- उसी प्रकार मनुष्य रुपी परिवार में भी सयुंक्त परिवार का बड़ा ही महत्व है जिस तरह अकेले पेड़ का तना अकेला सुंदर नही होता    उसी तरह एकल परिवार भी पूर्ण नही होता इसलिये सयुक्त परिवार में रहे सुंदर रहे ताकतवर बने रहे 

धरती माँ

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गांव की धरती  माँ  मेरे गाँव की माँ किसान अन्न फल तेरे से प्राप्त करता पूज्य हो तुम न किसी स्वार्थ के  करती हो आप सबका कल्याण गाँव को धरती माँ ! मेरे गाँव की माँ !! किसान खेत जोत कर अन्न उगाता मेघ आकर के वर्षा  करता  वसन्त के समय  पीले लाल पुष्प  आपके आभूषण लगते गाँव की धरती माँ ! मेरे गाँव की माँ!! कच्ची पक्की छोटी सड़के जिन पर खेलते छोटे बच्चें चारो तरफ हरियाली रहती  अनुपम सौन्दर्य लगता  तुम्हारी कोख में  विश्व किसान पलता किस्मत से गरीब ओर अमीर बनता तुम भार सबका सहती हो गाँव कि धरती माँ ! मेरे गाँव की माँ !! गंगा यमुना सब नदियॉ है आपकी देंन करती है उदार सबका गरीब अमीर तुम्हारे लिए  है सब एक गाँव की धरती माँ ! मेरे गाँव की माँ !! किसान तुम पर  धान उगाता बेचकर उसको पैसा किसान कमाता उसके जीवन में  खुशीयाँ लेकर आता  किसान का बेटा  आगे बढ़कर  नाम तेरा रोशन करता गाँव की धरती माँ मेरे गाँव की माँ    ...............                       ...

आज के बच्चो में भारतीय संस्कारों का अभाव

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यह केवल मेरे स्वयं के विचार है, साइकोलॉजी में विद्वानों ने कहा है- बालक जन्म के समय न तो सामाजिक होता है और नही असमाजिक में इस बात  खुुला समर्थन करता हु। मेने आज तक वही लिखा जो मेने या फिर अपनो से महसूस किया बालक जन्म के कुछ वर्षो तक यह नही जानता कि क्या उसका धर्म है। माता पिता कौन है, जन्म से ही बालक का पालन पोषण उसके माता पिता द्वारा ही होता है, वह उसको बोलना पढ़ना लिखना सबसे परिचय करवाते है अर्थात बालक को प्रथमिक शिक्षा प्रदान करते है  अतः बालक की प्रथम पाठशाला उसका परिवार ही होता है। माता पिता सम्पूर्ण जीवन मे परिश्रम करके  तथा उनके द्वारा कमाए पेसो का स्वयं उपुयोग न करके स्वयं की आवश्यकता को पूरा नही करके उनको(बच्चो को ) हर सुविधा मुहैया करवाते है,  जीवनभर दुख उठाते ओर बच्चो को किसी भी चीज़ की कमी महसूस नही होने देते  बच्चे जब बडे होते है तो उन्हें बेहतर शिक्षा के लिए गांव से शहर की ओर भेजते है, जिसे बालक अच्छी मेहनत करके अच्छे अंक प्राप्त कर सके तथा नोकरी पा सके स्वयं को सक्षम बना सके। हर बच्चे को अपने पिता से बहुत   उम्मीदे होती है ओर हर पि...